ट्रम्प ने भारतीयों के खिलाफ दक्षिणपंथी एंकर की भड़काऊ टिप्पणी साझा की, MEA ने इसे ‘अप्रिय’ बताया

नई दिल्ली, भारत – अमेरिकी पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने एक दक्षिणपंथी एंकर की भारत विरोधी टिप्पणी का समर्थन करते हुए उसे साझा किया, जिससे भारत सरकार की ओर से प्रतिक्रिया मांगी गई। इस पर विदेश मंत्रालय (MEA) ने इसे ‘अप्रिय’ और ‘उचित नहीं’ करार दिया।
MEA के प्रवक्ता ने स्पष्ट कहा कि यह टिप्पणी दोनों देशों के बीच मित्रवत संबंधों के अनुरूप नहीं है और इसे स्वीकार नहीं किया जा सकता। उन्होंने यह भी कहा कि भारत अपनी विदेश नीति में किसी भी तरह की असम्मानजनक भाषा को सहन नहीं करेगा।
यह प्रतिक्रिया तब आई जब विपक्ष के सदस्य और पूर्व राजनयिकों ने सरकार पर आरोप लगाया कि उसने इस मामले में उचित और सशक्त प्रतिक्रिया नहीं दी। उनका मानना है कि मामूली या संतुलित प्रतिक्रिया से भारत की अंतरराष्ट्रीय छवि प्रभावित हो सकती है और यह प्रभावी कूटनीति के खिलाफ है।
अमेरिका के दक्षिणपंथी एंकर द्वारा की गई टिप्पणी में भारतीयों को लेकर कई नकारात्मक और असंवेदनशील बातें थीं, जो कई नागरिकों और राजनयिक समुदाय में नाराजगी का कारण बनीं। इसके चलते सोशल मीडिया पर भी तीखी प्रतिक्रिया दर्ज की गई और भारत के समर्थन में कई आवाजें उठीं।
विदेश मंत्रालय के बयान ने स्पष्ट किया कि भारत अमेरिका जैसे मजबूत और पारंपरिक सहयोगी के साथ अपने सम्बंधों को मजबूती से बनाए रखना चाहता है, लेकिन इसके लिए सम्मान और पारस्परिक समझ जरूरी है। साथ ही, भारत सभी तरह की भड़काऊ और अपमानजनक अभिव्यक्ति के खिलाफ है।
विशेषज्ञों का कहना है कि इस तरह की टिप्पणियां दोनों देशों के बीच सामरिक और आर्थिक संबंधों पर नकारात्मक प्रभाव डाल सकती हैं, इसलिए दो पक्षों के लिए संवाद और समझ बढ़ाना आवश्यक है।
सरकार ने फिलहाल स्थिति को शांतिपूर्ण और कूटनीतिक तरीके से सुलझाने का प्रयास किया है, लेकिन विपक्ष का दबाव जारी है कि सीमा पार की इस तरह की टिप्पणी के विरूद्ध भारत को कड़ा रुख अपनाना चाहिए।
यह घटना भारत और अमेरिका के बीच बढ़ती राजनीतिक और आर्थिक साझेदारी के समय एक असामयिक बाधा के रूप में देखी जा रही है। दोनों देश मिलकर वैश्विक स्तर पर स्थिरता और विकास के लिए काम कर रहे हैं, इसीलिए विरोधाभासी बयानबाजी दोनों के हित में नहीं।
अगले कुछ दिनों में भारत सरकार से इस मामले में और अधिक स्पष्टता और कूटनीतिक कदमों की अपेक्षा जताई जा रही है, ताकि भविष्य में इस तरह की किसी भी स्थिति से बचा जा सके और द्विपक्षीय संबंध मजबूत बने रहें।





