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हवाई जहाजों के लिए बायोफ्यूल को प्राथमिकता देने की आवश्यकता: IATA

नई दिल्ली, भारत

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अंतर्राष्ट्रीय हवाई परिवहन संघ (IATA) ने विमानन उद्योग में पर्यावरणीय प्रभाव कम करने के लिए बायोफ्यूल के उपयोग को प्राथमिकता देने की जोरदार चेतावनी जारी की है। संगठन का मानना है कि जीवाश्म ईंधन पर निर्भरता कम करने के लिए और विमानन क्षेत्र को स्थायी बनाने के लिए बायोफ्यूल तत्काल आवश्यक हैं।

IATA के अनुसार, विमानन उद्योग वैश्विक कार्बन उत्सर्जन में महत्वपूर्ण योगदान देता है, और वर्तमान में उत्सर्जन को नियंत्रित करने के लिए उपलब्ध विकल्प सीमित हैं। इस संदर्भ में बायोफ्यूल एक प्रभावी और व्यवहारिक माध्यम साबित हो सकते हैं। हालांकि, अभी तक बायोफ्यूल की मात्रा सीमित और उत्पादन महंगा है, जिससे व्यापक पैमाने पर उपयोग में बाधाएं आ रही हैं।

संघ के प्रमुख अधिकारियों ने कहा कि सरकारों और उद्योग को मिलकर निवेश बढ़ाना होगा और बायोफ्यूल के उत्पादन तथा बाजार को बढ़ावा देना होगा। इस दिशा में सार्वजनिक-निजी भागीदारी तथा अनुसंधान विकास पर विशेष ध्यान देना जरूरी है। IATA का सुझाव है कि आगामी पांच वर्षों में बायोफ्यूल की हिस्सेदारी में उल्लेखनीय वृद्धि होनी चाहिए ताकि 2050 तक विमानन के कार्बन उत्सर्जन को शून्य के करीब लाया जा सके।

विशेषज्ञों का भी कहना है कि बायोफ्यूल पर्यावरण की दृष्टि से अधिक स्वच्छ हैं क्योंकि ये ट्रैडिशनल फॉसिल फ्यूल की तुलना में कम ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जित करते हैं। इसके अलावा, स्थानीय स्तर पर बायोफ्यूल के उत्पादन से आर्थिक विकास तथा रोजगार के अवसर भी बढ़ेंगे।

हालांकि, उद्योग में अभी कई तरह की चुनौतियां हैं, जिनमें कच्चे माल की उपलब्धता, कीमत, और तकनीकी सुधार शामिल हैं। इन्हें दूर करने के लिए व्यापक रणनीतियां बनाना आवश्यक है, जिसमें नीतिगत समर्थन, वित्तीय मदद, और जागरूकता का समावेश हो।

इस दिशा में कई एयरलाइंस और हवाई कंपनियां परीक्षण कर रही हैं और कुछ ने अपने कुछ मार्गों पर बायोफ्यूल आधारित उड़ानें शुरू कर दी हैं। विज्ञान और प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में भी लगातार नवाचार हो रहे हैं जो बायोफ्यूल के उत्पादन को सस्ता और अधिक प्रभावकारी बनाने में सहायक होंगे।

निष्कर्षतः, IATA ने स्पष्ट किया है कि विमानन उद्योग के प्रदूषण को कम करने और पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा देने के लिए बायोफ्यूल को प्राथमिकता देना अब समय की आवश्यकता है। वैश्विक सहयोग और समन्वित प्रयास से ही यह लक्ष्य संभव होगा।

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