पश्चिम एशिया संकट के कारण अप्रैल में मैन्युफैक्चरिंग पीएमआई चार सालों में दूसरी सबसे निचली स्तर पर

नई दिल्ली। अप्रैल 2026 में मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर का प्रदर्शन पिछले चार वर्षों में दूसरी सबसे कमजोर स्थिति में पहुंच गया है। इस गिरावट का मुख्य कारण पश्चिम एशिया में जारी संकट माना जा रहा है, जिसने वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला और उत्पादन गतिविधियों पर गहरा असर डाला है। उद्योग विशेषज्ञों का कहना है कि इस क्षेत्रीय संकट के कारण नई मांगों में कमी आई है, जिससे कारोबार प्रभावित हुआ है।
हालांकि अप्रैल का मैन्युफैक्चरिंग पर्चेजिंग मैनेजर्स इंडेक्स (पीएमआई) मार्च 2026 की तुलना में कुछ बेहतर संकेत दे रहा है, लेकिन नई खरीददार आदेशों और उत्पादन में गिरावट अभी भी काफी चिंताजनक स्थिति दिखाती है। रिपोर्ट में यह भी उल्लेख किया गया है कि उत्पादन की कीमतों में अप्रत्याशित वृद्धि हुई है, जो उद्योग के लिए एक बड़ी चुनौती बनी हुई है।
मैन्युफैक्चरिंग पीएमआई अप्रैल में 42.3 अंक पर पहुंच गया है, जो पिछले चार वर्षों में दूसरी सबसे कम दर है। यह संकेत देता है कि उद्योग अभी भी दबाव में है और वैश्विक आर्थिक अनिश्चितताओं के कारण विकास सीमित है। विशेषज्ञों का मानना है कि पश्चिम एशियाई संकट के साथ-साथ कच्चे माल की कीमतों में बढ़ोतरी ने कंपनियों की लागत बढ़ा दी है और यह बढ़ती कीमतें उपभोक्ताओं तक पहुंच रही हैं।
अप्रैल में बढ़ी इनपुट कीमतों ने मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर की मुनाफाखोरी को भी प्रभावित किया है। कई कंपनियों ने उत्पादन की लागत कम करने के लिए उपाय खोजने शुरू कर दिए हैं, लेकिन वैश्विक बाजार में अनिश्चितता के कारण स्थिति में तेजी से सुधार अपेक्षित नहीं है।
विशेषज्ञों के अनुसार, नीति निर्धारक इस अवस्था को समझते हुए औद्योगिक हलचल को बढ़ावा देने व बेहतर निवेश माहौल बनाने की कोशिश कर रहे हैं। साथ ही आपूर्ति श्रृंखला को सुदृढ़ करने के लिए भी पहलें शुरू की गई हैं। यह कदम अगले कुछ महीनों में आर्थिक सुधार के संकेत दे सकते हैं।
अंत में, माना जा रहा है कि अगर पश्चिम एशिया संकट का समाधान नहीं निकला तो उत्पादन व मांग दोनों पर नकारात्मक असर बना रहेगा। इसके चलते कारोबारियों के लिए चुनौतियां बरकरार रह सकती हैं और आर्थिक विकास की धीमी रफ्तार जारी रहने की संभावना है। इस संदर्भ में, उद्योग जगत की निगाहें आगामी आर्थिक नीतियों और वैश्विक स्थिरता पर टिकी हैं।



