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एसबीआई ने सुप्रीम कोर्ट के फैसले की समीक्षा मांगी, जिसमें कहा गया कि ‘स्पेक्ट्रम’ को IBC प्रक्रियाओं में संपत्ति के रूप में मान्यता नहीं दी जा सकती

नई दिल्ली, भारत – भारतीय स्टेट बैंक (SBI) ने सुप्रीम कोर्ट के उस निर्णय की समीक्षा की मांग की है जिसमें कहा गया है कि कॉलिंग स्पेक्ट्रम को दिवाला और दिवालियापन संहिता (IBC) की प्रक्रियाओं में संपत्ति के रूप में नहीं माना जा सकता। इस फैसले के तहत, केवल लाइसेंस के माध्यम से स्पेक्ट्रम का आवंटन प्राकृतिक संसाधन के पूर्ण हस्तांतरण के बराबर नहीं माना गया है।

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सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया था कि स्पेक्ट्रम के लाइसेंस के माध्यम से प्रदान किए जाने का अर्थ यह नहीं है कि केंद्र सरकार ने सीमित प्राकृतिक संसाधन को पूरी तरह से ट्रांसफर कर दिया है। इस निर्णय ने दूरसंचार क्षेत्र में स्पेक्ट्रम को लेकर चल रही कई विवादों पर असर डाला है और साथ ही बैंकिंग और वित्तीय संस्थानों के लिए भी जरूरी दिशा-निर्देश प्रस्तुत किए हैं।

SBI का कहना है कि यह निर्णय वित्तीय लेनदेन और दिवालियापन फैसलों में अस्पष्टता पैदा कर सकता है क्योंकि स्पेक्ट्रम जैसे महत्वपूर्ण संपत्ति के दर्जे को स्पष्ट करना आवश्यक है। बैंक ने सुप्रीम कोर्ट से पुनर्विचार याचिका दायर करके इस फैसले की समीक्षा का अनुरोध किया है ताकि स्पेक्ट्रम को संपत्ति माना जा सके और संबंधित लेनदेन, दावे और वित्तीय व्यवहार बेहतर हो सकें।

विशेषज्ञों के अनुसार, स्पेक्ट्रम का दर्जा IBC के तहत महत्वपूर्ण है क्योंकि यह दूरसंचार कंपनियों के वित्तीय स्वास्थ्य और दिवालियापन मामलों में सीधे प्रभाव डालता है। यदि स्पेक्ट्रम को संपत्ति की श्रेणी में नहीं लिया गया, तो क्रेडिटर्स के अधिकार प्रभावित हो सकते हैं और दिवालियापन प्रक्रिया जटिल हो सकती है।

केंद्रीय सरकार ने भी इस मामले में कुछ स्पष्टता प्रदान करने की ज़रूरत पर बल दिया है, ताकि दूरसंचार क्षेत्र में निवेशक और वित्तीय संस्थान सुनिश्चित हो सकें कि उनके अधिकारों और दावों की रक्षा की जाएगी। इस विवाद का असर दूरसंचार सेक्टर की वृद्धि और प्रतिस्पर्धा पर भी पड़ सकता है, क्योंकि स्पेक्ट्रम का उपयोग और मूल्यांकन इस क्षेत्र की नींव माना जाता है।

इससे पहले, कोर्ट ने कहा था कि स्पेक्ट्रम केवल सरकारी स्वामित्व में रहता है और यह केवल विवेकानुसार उपयोग के लिए लाइसेंसधारक को दिया जाता है, लेकिन इसका पूर्ण ट्रांसफर नहीं होता। इस विषय पर विमर्श अब और गहरा हो गया है क्योंकि वित्तीय संस्थान इसे लेकर स्पष्ट नियम चाहते हैं।

एसबीआई सहित अन्य क्रेडिटर्स और दूरसंचार कंपनियां इस समीक्षा याचिका के परिणामों का बेसब्री से इंतजार कर रही हैं, जिससे नीति निर्धारक और न्यायपालिका को भी दिशा मिलेगी कि किस तरह से स्पेक्ट्रम को शामिल किया जाए और दिवालियापन प्रक्रिया में उसे किस रूप में देखा जाए।

यह मामला दूरसंचार क्षेत्र में आर्थिक सुधार और बाजार स्थिरता के लिए भी अहम माना जा रहा है, जिससे भविष्य में निवेश को प्रोत्साहन मिलने की उम्मीद है।

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