‘टू वुमेन’ मूवी रिव्यू: कनाडाई कॉमेडी अतीत में फँसी हुई

Mumbai, Maharashtra – हाल ही में रिलीज़ हुई फिल्म ‘टू वुमेन’, जिसे क्लोए रोबिचॉड ने निर्देशित किया है, एक ऐसी कॉमेडी है जो अपने समय के अनुसार चल नहीं पाई। इस फिल्म की कहानी एक पुराने ढर्रे पर आधारित है, जो आज के दर्शकों के लिए ताजा और मजेदार नहीं लगती।
फिल्म की पटकथा में उस त्रिकोण को दर्शाने की कोशिश की गई है जो पहले के जमाने में मनोरंजक लगता था, परंतु आज की बदलती सोच और सांस्कृतिक परिवर्तनों के बीच यह प्रेरणा कमजोर पड़ गई है। यह फिल्म हास्य पैदा करने के बजाय कई बार उसे दोहराने का प्रयास करती नजर आती है।
‘टू वुमेन’ की मुख्य कहानी दो महिलाओं के इर्द-गिर्द घूमती है, लेकिन यह संवाद और दृश्य इतने प्रभावशाली नहीं हैं कि दर्शक गहराई से जुड़ पाएं। पातर चरित्र चित्रण और पूर्वानुमानित घटनाक्रम ने फिल्म की स्फूर्ति को कम कर दिया है। इसे देखकर ऐसा लगता है कि फिल्म निर्माता पुरानी कॉमेडी को आज के नजरिए से समझ नहीं पाए हैं।
फिल्म के सुधार की गुंजाइश हालांकि बाकी है, अगर कहानी को आधुनिक संदर्भ में ढाला जाए और पात्रों के संबंधों में प्राकृतिकता लाई जाए। साथ ही, संवादों को अधिक जीवंत और प्रासंगिक बनाने की आवश्यकता है।
यह कहना गलत नहीं होगा कि ‘टू वुमेन’ में रोचक तत्व विद्यमान हैं, पर उनका सही तरीके से उपयोग नहीं हो पाया। एक कॉमेडी फिल्म के रूप में यह दर्शकों को हंसाने में असफल रही है क्योंकि यह पुराने और सतही हास्य पर निर्भर रहती है।
कनाडाई सिनेमा के प्रति इस फिल्म का योगदान सीमित रह गया है, क्योंकि यह अपनी संभावनाओं को पूरी तरह से एक रूप में प्रस्तुत नहीं कर पाई। यदि भविष्य में निर्देशक और निर्माता इस तरह की फिल्मों में नवीन दृष्टिकोण अपनाएं तो निश्चित रूप से बेहतर परिणाम देखने को मिलेंगे।
अंततः, ‘टू वुमेन’ एक ऐसा प्रयास है जो पुराने ज़माने की कॉमेडी को फिर से प्रदर्शित करने की कोशिश करता है, लेकिन वह उस चमक को वापस पाने में असफल रहता है जिसे आज के युग की कॉमेडी दर्शकों से मांगती है।





