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ट्रम्प प्रशासन का दावा: ईरान युद्ध स्थगित हुआ सैन्य समझौते के तहत, कांग्रेसी मंजूरी से बचाव

ट्रम्प प्रशासन द्वारा ईरान युद्ध को एक सैन्य समझौते के तहत समाप्त बताया गया है, जिससे कांग्रेस की मंजूरी से बचाव किया गया है। इस दावे को लेकर विधायकों और कानूनी विशेषज्ञों ने तीखी आलोचना की है। उनका कहना है कि 1973 के कानून के तहत युद्ध के टाईमलाइन को रोकना या स्थगित करना संभव नहीं है, और प्रशासन की व्याख्या इस कानून के मूल उद्देश्यों के खिलाफ है।

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1973 के युद्ध प्राधिकरण अधिनियम (War Powers Resolution) के अनुसार, राष्ट्रपति केवल 60 दिन तक बिना कांग्रस की मंजूरी के विदेशी सेना भेज सकते हैं, और उसके बाद कार्यवाही को स्थगित या समाप्त करने के लिए कांग्रस की सहमति आवश्यक होती है। ट्रम्प प्रशासन ने इस कानून की व्याख्या इस तरह की है कि सैन्य कार्रवाई अस्थायी रूप से रुकी हुई मानी जा सकती है, जिससे वे कांग्रस की स्वीकृति की प्रक्रिया से बच पा रहे हैं।

विधायक और राष्ट्रीय सुरक्षा विशेषज्ञ इस दावे को गलत बताते हुए कहते हैं कि इससे अमेरिका के संविधान में निहित न्यायिक समीक्षा और संतुलन की व्यवस्था कमजोर होगी। उनके अनुसार, यदि राष्ट्रपति युद्ध को निरंतर प्रभावी रूप से जारी रखने की इच्छा रखते हैं, तो उन्हें कांग्रस के समक्ष इसे प्रस्तुत करना होगा और उससे अनुमोदन लेना होगा, न कि युद्ध की स्थिति को ‘ठहराव’ की स्थिति में रखकर बचाव करना।

इस मुद्दे पर अमेरिका के शीर्ष कानूनी विद्वान भी इस व्याख्या को खारिज करते हैं। उनका स्पष्टीकरण है कि 1973 के युद्ध प्राधिकरण अधिनियम का उद्देश्य राष्ट्रपति की युद्ध की शक्तियों को सीमित करना था ताकि कांग्रस को भी युद्ध संबंधित निर्णयों में शामिल रखा जा सके। ट्रम्प प्रशासन के कदम से यह संतुलन बिगड़ सकता है।

पिछले कई वर्षों से, युद्ध प्राधिकरण अधिनियम को लेकर अमेरिकी राजनीतिक पटल पर बहस जारी रही है। कुछ प्रशासन इसे राष्ट्रपति को आवश्यक शक्ति देने के पक्ष में हैं, जबकि अन्य इसके जरिए कांग्रस की भूमिका को ताक पर रखने की कोशिश समझते हैं। ट्रम्प प्रशासन की व्याख्या इसी बहस को और गहरा कर सकती है।

प्रतिपक्षी विधायकों ने इस मुद्दे पर जांच और सुनवाई की मांग की है ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि अमेरिका की संप्रभुता और संवैधानिक व्यवस्था का सम्मान हो। वे प्रशासन के इस ‘ठहराव’ व्याख्या की कानूनी वैधता की समीक्षा चाहते हैं। कानूनी विशेषज्ञ और सांसद समान रूप से इस बात पर जोर दे रहे हैं कि सुरक्षा नीतियों में पारदर्शिता होनी चाहिए और कांग्रस को अपनी संवैधानिक भूमिका निभाने से वंचित नहीं किया जाना चाहिए।

अमेरिकी मीडिया और विश्लेषकों के बीच भी यह विवाद गूंज रहा है, जो प्रशासन और कांग्रस के बीच शक्ति के संतुलन पर प्रश्न उठाता है। इस विवाद का अंत कैसे होगा तथा युद्ध प्राधिकरण अधिनियम की व्याख्या को लेकर क्या निर्णय लिया जाएगा, यह आने वाले समय में स्पष्ट होगा। फिलहाल यह विवाद अमेरिकी सुरक्षा और लोकतांत्रिक नीति निर्माण की धुरी बनता जा रहा है।

Source

Ankur Ramaul

Ankur Ramaul is the Founder of DigiWorld India and the editorial lead at DW24 News, a digital news platform covering national and international stories across politics, business, sports, education, health, and entertainment. He is committed to accurate, unbiased and reader-friendly journalism. For news tips, press releases or collaborations, reach him through the DW24 News Contact page.

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