केरल में मुकदमे की आशंका से ब्रेनस्टेम डेथ सर्टिफिकेशन रुक-सा गया: अध्ययन में हुआ खुलासा

केरल में ब्रेनस्टेम डेथ (BSD) सर्टिफिकेशन को लेकर हाल ही में एक अध्ययन में महत्वपूर्ण निष्कर्ष सामने आए हैं। अध्ययन के अनुसार, अगर अस्पतालों में आईसीयू के स्तर पर एफायलीडीयोजन के लिए नहीं बल्कि आईसीयू संसाधनों की बचत, अस्पताल के खर्चों को कम करने और परिवारों को अतिरिक्त मानसिक तनाव से बचाने के लिए ब्रेनस्टेम डेथ सर्टिफिकेशन को संस्थागत नीति के रूप में शामिल नहीं किया जाता है, तो मृतक अंग दान की दरों में वांछित वृद्धि होना मुश्किल है।
ब्रेनस्टेम डेथ को प्रमाणित करना एक संवेदनशील प्रक्रिया है और इसके लिए अस्पतालों को चार्टर्ड नीतियां अपनानी जरूरी होती हैं। लेकिन केरल के अस्पतालों में मुकदमेबाजी के डर से इस प्रक्रिया में हिचकिचाहट देखने को मिलती है, जिससे न केवल आईसीयू संसाधनों का अपव्यय होता है बल्कि मृतक के परिवारों को भी अनावश्यक दुख और मानसिक दबाव सहना पड़ता है।
अध्ययन में यह भी बताया गया है कि ब्रेनस्टेम डेथ सर्टिफिकेशन को अंग दान के लिए प्राथमिक उद्देश्य बनाकर न देखा जाए बल्कि इसे एक दीर्घकालिक संस्थागत नीति के हिस्से के रूप में अपनाया जाए जो ICU संसाधनों का सदुपयोग सुनिश्चित करे। इससे न केवल कीमती संसाधनों की बचत होगी बल्कि अस्पताल के बिलों में भी अनावश्यक बढ़ोतरी से बचा जा सकेगा।
विशेषज्ञों का कहना है कि भारत में अंग दान को बढ़ावा देने के लिए जागरूकता के साथ-साथ अस्पतालों को इस प्रक्रिया को अपनाने के लिए कड़े नियम और समर्थन आवश्यक है। केसों में कानूनी परेशानियों से बचने के लिए अस्पताल प्रशासन को स्पष्ट मार्गदर्शन देना होगा और चिकित्सकों को प्रशिक्षित करना होगा ताकि वे ब्रेनस्टेम डेथ के प्रमाणपत्र देने में आश्वस्त रहें।
अस्पताल प्रबंधन और सरकारी स्वास्थ्य विभागों को मिलकर ऐसी कार्यप्रणाली विकसित करनी होगी जिससे मृतक अंग दान ना केवल सुचारू रूप से बढ़े बल्कि आईसीयू के महंगे संसाधनों का भी सर्वोत्तम उपयोग हो सके। इससे न केवल मरीजों के लिए बेहतर सेवा उपलब्ध होगी बल्कि चिकित्सा क्षेत्र में सुधार और पेसेंट परिवारों के लिए राहत की स्थिति पैदा होगी।
यह अध्ययन इस बात पर प्रकाश डालता है कि केरल जैसे राज्य में कानूनी जटिलताओं और भय के माहौल को दूर कर चिकित्सा संस्थानों को अपने भीतर उचित नीतियां और पारदर्शिता लागू करनी होगी, तभी ब्रेनस्टेम डेथ सर्टिफिकेशन के माध्यम से स्वास्थ्य सेवा और मृतक अंग दान दोनों क्षेत्रों में प्रगति संभव होगी।



