भारत का औसत तापमान पिछले दस वर्षों में 0.9 डिग्री सेल्सियस बढ़ा: अध्ययन

नई दिल्ली: हाल ही में जारी एक वैज्ञानिक अध्ययन में पाया गया है कि भारत के औसत तापमान में बीते दशक के दौरान 0.9 डिग्री सेल्सियस की वृद्धि हुई है। यह वृद्धि देश में जलवायु परिवर्तन की गंभीरता को दर्शाती है और इसके तत्काल प्रभावों पर ध्यान केंद्रित करना जरूरी बनाती है।
इस अध्ययन को राष्ट्रीय पर्यावरण संस्थान और विभिन्न मौसम विज्ञान विभागों के सहयोग से तैयार किया गया है। रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि तापमान वृद्धि के कारण भारत के कई हिस्सों में परंपरागत मौसम पैटर्न बाधित हो रहे हैं। कृषि, जल संसाधन, और मानव स्वास्थ्य पर इसके दुष्प्रभाव गहराते जा रहे हैं।
विशेषज्ञों का कहना है कि इस बढ़ोतरी की प्रमुख वजह मानव गतिविधियों से निकलने वाले ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन हैं। पिछले दशक में औद्योगिकीकरण, जनसंख्या वृद्धि और वाहन संचालन की संख्या में वृद्धि के चलते वातावरण में कार्बन डाइऑक्साइड की मात्रा में उल्लेखनीय इजाफा दर्ज हुआ है।
अध्ययन में यह भी कहा गया है कि भारत की अलग-अलग जलवायु क्षेत्रों में तापमान बढ़ने की दर अलग-अलग है। उत्तर भारत के मैदानी इलाकों तथा पश्चिमी रेगिस्तानी क्षेत्रों में तापमान वृद्धि अधिक देखी गई है। इससे वहां के पारिस्थितिक तंत्र पर नकारात्मक प्रभाव पड़ रहा है।
सरकारी एजेंसियां और नीति निर्माताओं को इस सूचना के मद्देनजर तत्काल कदम उठाने की जरूरत है। तापमान वृद्धि को नियंत्रित करने के लिए नवीनीकृत ऊर्जा स्रोतों को बढ़ावा देना, वृक्षारोपण अभियान तेज करना और प्रदूषण नियंत्रण की सख्ती आवश्यक है।
जलवायु परिवर्तन की चुनौतियों से निपटने के लिए सामूहिक प्रयासों की आवश्यकता है। वैज्ञानिकों ने आम जनता को भी ऊर्जा की बचत, प्लास्टिक का कम उपयोग और स्थायी जीवनशैली अपनाने की सलाह दी है ताकि आने वाली पीढ़ियों के लिए एक बेहतर और स्वच्छ पर्यावरण सुनिश्चित किया जा सके।
इस अध्ययन की पूरी रिपोर्ट अगले महीने प्रकाशित की जाएगी, जिसमें और भी विस्तृत आंकड़े और सुझाव शामिल होंगे। पर्यावरण संरक्षण तथा जलवायु नियंत्रण के लिए सामूहिक जागरूकता बढ़ाना अब समय की मांग है।



