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केरल में इलायची का भाव सात वर्षों के उच्चतम स्तर पर, कीमत 6,000 रुपये प्रति किलोग्राम से पार

केरल के इडुक्की जिले में इलायची (कार्डमम) के दाम पिछले सात वर्षों में सबसे ऊंचे स्तर पर पहुंच गए हैं। स्थानीय विक्रेताओं के अनुसार, यहां की तेज़ गर्मियां और मौसम की असामान्य परिस्थितियां इलायची की फसल को प्रभावित कर रही हैं, जिससे इसकी कीमतों में भारी वृद्धि हुई है। इसके अलावा, आने वाले फसल मौसम में उत्पादन घटने की उम्मीदें भी कीमतों पर दबाव डाल रही हैं।

इलायची को ‘मसालों की रानी’ कहा जाता है और इसका उत्पादन इडुक्की जैसे उच्च पहाड़ी क्षेत्रों में प्रमुख रूप से होता है। इस बार उच्च तापमान ने फसल के विकास को प्रभावित किया है, जिससे गुणवत्ता वाला इलायची उत्पाद कम मात्रा में उपलब्ध हो रहा है। स्थानीय व्यापारी इस कमी को आपूर्ति की तंगी के रूप में देख रहे हैं, जिससे कीमतें आसमान छू रही हैं।

इसके अतिरिक्त, किसान भी आगामी फसल सीजन में उत्पादन के कम होने का अनुमान लगा रहे हैं। इस संभावना से बाजार में पहले से ही खरीददारी बढ़ गई है, जिससे इलायची की कीमतें और ऊपर गई हैं। हाल के आंकड़ों के अनुसार केरल में इलायची का मूल्य अब ₹6,000 प्रति किलोग्राम से अधिक हो गया है, जो पिछले सात वर्षों में सबसे अधिक है।

विक्रेताओं का मानना है कि अगर मौसमी परिस्थितियों में सुधार नहीं होता है, तो आने वाले महीनों में इलायची के दाम और बढ़ सकते हैं। यह स्थिति उपभोक्ताओं और मसालों के निर्यातक दोनों के लिए चिंता का विषय बनी हुई है। विशेषज्ञों का सुझाव है कि किसानों को फसल की निगरानी सख्ती से करनी चाहिए और उपयुक्त तकनीकों के माध्यम से उत्पादन बढ़ाने की कोशिश करनी चाहिए ताकि बाजार में संतुलन बना रहे।

सरकार ने भी इस क्षेत्र में फसल सुरक्षा और किसानों को वित्तीय सहायता देने के लिए कदम उठाने की बात कही है। उम्मीद की जा रही है कि इन प्रयासों से आने वाले समय में इलायची की आपूर्ति बढ़ेगी और कीमतों में स्थिरता आएगी। फिलहाल, इडुक्की की इलायची की बढ़ती कीमतें मसाले उद्योग के लिए एक बड़ा संकेत हैं कि जलवायु परिवर्तन और प्राकृतिक आपदाओं का खेती और व्यापार दोनों पर गहरा असर पड़ रहा है।

इस संकट के बीच आम उपभोक्ताओं को भी इलायची के दामों में बढ़ोतरी का सामना करना पड़ रहा है, जो मसालों की मांग को प्रभावित कर सकता है। व्यापारी इस संकट को ध्यान में रखते हुए भविष्य की योजनाएं बना रहे हैं ताकि बाजार में समान्य स्थिति वापस आ सके और किसान भी उचित मूल्य प्राप्त कर सकें।

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